‘अध्यापकों
की भूमिका और दायित्व’ - जिस देश के भीतर ताकतवर और इमानदार अध्यापक
है उस देश का भविष्य उज्ज्वल रहेगा। उसके विकास की गति बिना अवरोध बढ़ती जाएगी। यह
अपनी पीठ ठोंकना नहीं है। हमारे देश में गुरुओं की लंबी परंपरा है और उन्हें सम्मान
भी हैं। इतिहास कुछ अलग बयां करता है और वर्तमान कुछ अलग है। आज अध्यापकों की
भूमिकाएं और दायित्व वे नहीं हैं जो इतिहास में थे। शिक्षा व्यवस्था बदली, उसकी
मांग और प्रयोजन बदले... तो विद्यार्थी, अध्यापक और समाज भी बदला। अध्यापक का
मान-सम्मान और प्रतिष्ठा घटती गई अब वह दोस्त की धरातल पर उतर चुका है। इसी पर
प्रकाश डालता आलेख ‘अध्यापकों की
भूमिका और दायित्व’ रचनाकार ई-पत्रिका में प्रकाशित है, आपके लिए यहां उसकी
लिंक दे रहा हूं। आगे पढ़ें: अध्यापकों की भूमिका और दायित्व
डॉ. विजय शिंदेमेरे ब्लॉग पर स्वलिखित हिंदी भाषा की रचनाएं हैं, जिसमें समीक्षात्मक आलेख, लेख,अनुवाद और सृजनात्मक रचनाएं हैं। साथ ही इस ब्लॉग पर ई पत्रिकाओं में प्रकाशित साहित्य के लिंक भी मौजूद है। आप रचनाओं को पढने के लिए दाएं 'रचनाएं' में जाकर मनपसंद विधा को क्लिक करें। सीधे ब्लॉग पर वह रचना या उसकी लिंक आएगी। लिंक पर दुबारा क्लिक करने पर मूल ई-पत्रिका में प्रकाशित रचना तक आप पहुंच सकते हैं।
गुरुवार, 16 मई 2013
रविवार, 12 मई 2013
हिंदी भाषा और विवेकी राय
हमारा देश भारत है और उसकी राष्ट्रभाषा हिंदी है पर यह भाषा फिलहाल ज्ञान भाषा नहीं बन पाई है। देशी भाषा ज्ञान भाषा न होने का अप्रत्यक्ष नुकसान हम उठा रहे हैं। हिंदी भाषा के प्रसिद्ध लेखक विवेकी राय और उनके साहित्य को ध्यान में रख कर यह आलेख लिखा है। आगे पढ़ें: हिंदी भाषा और विवेकी राय
शुक्रवार, 10 मई 2013
नम्र सूचना
नम्र सूचना
मेरे प्यारे ब्लॉगर दोस्तों और गुगल प्लस के दोस्तों आपको बडी नम्रता के साथ बता रहा हूं कि फिलहाल छुट्टियां शुरू है और मैं एक महिने के लिए गांव आया हूं, अतः आपसे संपर्क करने, आपके पाठ पढने और वहां तक नेट की गति कम होने से पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। गांव में '3 जी' चलता नहीं और केवल 'जी' या '2 जी' की गति ए राजा जैसे राजनेताओं के घर और बैंक बॅलंस बढाने में खत्म हो गई है। अतः गांव घर और देश लाखों करोडों का नुकसान उठा कर उपेक्षा भुगत रहा है। और हम गतिविहिन होकर ठहर चुके हैं। धन्य हमारे देश के हे (ए) राजा, राजनीतिक राजा।
जैसे ही छुट्टियां खत्म होगी आपके साथ दूबारा जुडूंगा। आपके बिना सुनापन महसूस तो कर रहा हूं। मैं मेरा कर्तव्य मानता हूं कि यह सूचना आप तक पहुंचा दूं। बिना बताए गायब होना अपराध है, अतः अपराध से बचने के लिए मेरा यह प्रयास है।
सादर नमस्ते। मिलेंगे।
डॉ. विजय शिंदे
मंगलवार, 30 अप्रैल 2013
मुझे जीना नहीं आता
बशर नवाज उर्दू के प्रसिद्ध कवि हैं। उनकी चर्चित नज्म हिंदी पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहा हूं। मूलतः यह नज्म रचनाकार ई-पत्रिका में प्रकाशित हो गई है। नीचे लिंक पर क्लिक कर आप मूल रचना पढ सकते हैं।
आगे पढ़ें: रचनाकार: बशर नवाज की नज्म - मुझे जीना नहीं आता http://www.rachanakar.org/2013/04/blog-post_29.html#ixzz2Rwzi0MqW
सोमवार, 8 अप्रैल 2013
जीत - मराठी कहानी का अनुवाद
शंकर पाटिल की मराठी कहानी - जीत
आगे पढ़ें: रचनाकार: शंकर पाटिल की मराठी कहानी - जीत http://www.rachanakar.org/2013/04/blog-post_8.html#ixzz2PslxvWMp प्रस्तुत कहानी का अनुवाद विचार वीथी मासिक ई-पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ है पाठकों के लिए उसकी लिंक है - विचार वीथी: जीत
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